जुनैद पारेख की रिपोर्ट जिला कोंडागांव

जाणता राजा’ ने छ ग़ मे शानदार प्रस्तुति दी
केशकाल । छ ग़ मे मंचित “जाणता राजा” में छाए महाराष्ट्र मंडल के कलाकारो मंचित हुआ.. महानाट्य ‘जाणता राजा’ एक ऐसा गौरवशाली महानाट्य है, जिसमें कलाकारों के लिए काम करने का आशय अपने रंगमंचीय जीवन को सार्थक कर लेना है। इस बार यह सौभाग्य महाराष्ट्र मंडल के 100 सहित छत्तीसगढ़ के लगभग 40 कलाकारों को मिला है।… तीन घंटे के इस महानाट्य में एक भी ऐसा पांच मिनट नहीं गुजरता, जिसमें रायपुर के कलाकार 80 फीट लंबे और 40 फीट चौड़े रंगमंच पर दिखाई न दें।..इनमें से ज्यादातर कलाकार तो पहली बार रंगमंच पर उतरे हैं।
महाराष्ट्र मंडल के कुछ ऐसे भी कलाकार हैं, जो इस नाटक पर काम करने के अनुभव को शेयर करते हुए
अपने आंसू रोक नहीं पाते। आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले 18 वर्षों के बाद ‘जाणता राजा’ में फिर सहभागिता को लेकर गौरवान्वित हैं।… आस्था कहतीं हैं -कि ऑडिशन में चयन होने और रिहर्सल करने की सूचना मिलते ही भीतर उत्साह जाग गया।..चार दिनों तक पूरे समर्पण और ऊर्जा के साथ संवाद, गीत, कव्वाली, डिंडी और लावणी का अभ्यास करने के बाद मंच पर सिद्धहस्त पुणे के कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिला। वे बताती हैं कि उन्हें क्रिश्चियन मां की भूमिका मिली, जो अपने बच्चों के साथ भयभीत रहती है, पर छत्रपति शिवाजी महाराज उसकी सुरक्षा का संदेश भिजवाते हैं।..भूमिका छोटी होते हुए भी यादगार रही। यह अनुभव केवल एक नाटक नहीं, बल्कि इतिहास, सम्मान और गौरव से जुड़ी एक अविस्मरणीय यात्रा बन गया।..विशाल राहटगांवकर ने ‘जाणता राजा’ में मराठा और मुगल सैनिकों के किरदार निभाए।.. वे नाटक के अंतिम सीन में, जब छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक होता है,.. तब एक मावला बनकर ऊपर से देखते है, जो उनके लिए बहुत भावुक क्षण था। छतीसगढ़ के गणेशा जाधव पाटिल ने कहा कि ‘जाणता राजा’ का चार दिवसीय मंचन जीवनभर के लिए
अविस्मरणीय, भावनात्मक और प्रेरणादायी रहा।… सौभाग्य से मंचन पर उनके हें, अपने दोनों बेटों कृष्णाराज और राधे राणा के साथ काम करने का अवसर मिला।…. बाल राजाराम महाराज बने राधे राणा बताते हैं… कि हम बाल कलाकारो को सभी ने बहुत प्रेम से सिखाया और संभाला।
उनके बड़े भाई कृष्णराज के अनुसार ऑडिशन से देकर जाणता राजा में काम करने का हर पल का अनुभव लें कभी नहीं भूल सकते।… महाराष्ट्र मंडल की पर्यावरण समिति के समन्वयक अभय भागवतकर के शब्दों में ‘एक दिव्य स्वप्न का पूर्ण होना था ‘जाणता राजा’ के लिए चयन होना।..नाटक में जब हमें महाराज के मावले अर्थात सैनिक के रूप में मंच पर आना था, यह सोचकर ही दिल की धड़कन बढ़ी हुई थी.. हो रहा महानाट्य ‘जाणता राजा’ एक ऐसा गौरवशाली महानाट्य है,..जिसमें कलाकारों के लिए काम करने का आशय अपने रंगमंचीय जीवन को सार्थक कर लेना है। छत्तीसगढ़ मराठा समाज के कार्यकारी अध्यक्ष -लोकेश गायकवाड, ज़िला महासमुन्द के अध्यक्ष -राजेंद्र घाटगे, डोंडी के चोरमारे धमतरी से विनोद राव रणसिँह जी ने जाणता राजा के मुख्य पात्रों से चर्चा की.. उन्होंने बताया की 16 वर्षो से चल रही इस अभिनय यात्रा मे एक अलग से शुकुन पाते हैँ.. छत्तीसगढ़ मराठा समाज ने आगामी 2026 मे धमतरी और जगदलपुर मे यह कार्यक्रम आयोजीत होगा!


