जुनैद पारेख की रिपोर्ट जिला कोंडागांव

केशकाल नगर पंचायतकरोड़ों की वाटर एटीएम मशीन बनी शोपीस, भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे राहगीर
केशकाल, जिला कोंडागांव।एक ओर भीषण गर्मी से जनजीवन अस्त-व्यस्त है, वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत केशकाल की उदासीनता के कारण आम नागरिकों और राहगीरों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नगर पंचायत द्वारा डिपो चौक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के समीप करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित वाटर एटीएम मशीनें लंबे समय से बंद पड़ी हुई हैं। लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई यह सुविधा आज केवल दिखावे की वस्तु बनकर रह गई है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब इन वाटर एटीएम मशीनों का उद्घाटन किया गया था, तब इसे नगर की बड़ी उपलब्धि बताया गया था। दावा किया गया था कि राहगीरों, मरीजों के परिजनों और आम लोगों को चौबीसों घंटे स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि मशीनें बंद हैं और जिम्मेदार अधिकारी मौन हैं।डिपो चौक नगर का प्रमुख व्यावसायिक एवं यातायात केंद्र है, जहां प्रतिदिन हजारों लोगों की आवाजाही होती है। वहीं अस्पताल परिसर के आसपास दूर-दराज गांवों से आने वाले मरीज एवं उनके परिजन भी बड़ी संख्या में मौजूद रहते हैं। ऐसे महत्वपूर्ण स्थानों पर पेयजल सुविधा बंद होने से लोगों को मजबूरी में महंगे दामों पर बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है या फिर प्यासे ही अपना सफर तय करना पड़ रहा है।गर्मी का पारा लगातार बढ़ रहा है और तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच रहा है। ऐसी स्थिति में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। लेकिन नगर पंचायत की लापरवाही के कारण जनता को राहत मिलने के बजाय परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति का रखरखाव नहीं होने से सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है।नगरवासियों ने सवाल उठाया है कि जब मशीनों की स्थापना पर भारी राशि खर्च की गई, तो उनके संचालन और रखरखाव की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? आखिर लंबे समय से बंद पड़ी इन मशीनों को चालू कराने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया? यदि समय रहते इन सुविधाओं को चालू नहीं किया गया तो यह परियोजना पूरी तरह विफल साबित होगी।लोगों की यही मांग है कि बंद पड़े वाटर एटीएम की तत्काल मरम्मत कर उन्हें चालू किया जाए तथा नियमित रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भीषण गर्मी में आम जनता, मरीजों के परिजनों एवं राहगीरों को राहत मिल सके।जनता का सीधा सवाल — करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि प्यासे लोगों को पानी नहीं मिल रहा, तो ऐसी योजनाओं का आखिर क्या औचित्य है?


